google.com, pub-5031399508792770, DIRECT, f08c47fec0942fa0 सीढ़ियां चढ़ते हुए सांस फूलती है तो हो सकता है घातक, जानें इसके बारे में - Ayurveda And Gharelu Vaidya Happy Diwali 2018

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सीढ़ियां चढ़ते हुए सांस फूलती है तो हो सकता है घातक, जानें इसके बारे में

हृदयाघात-

सीढ़ियां चढ़ते वक्त सांस फूलती है तो सावधान हो जाएं। रक्त वाहिकाओं में ब्लॉकेज से हृदय तक रक्त नहीं पहुंचने से हृदयघात होता है। एक दम से सीने में तेज दर्द, सांस फूलने, पसीना आने पर तुरंत अस्पताल ले जाएं। गोल्डन आवर ट्रीटमेंट से 80% मरीज बच सकते हैं। डिस्प्रिन दें, ईसीजी कराएं। कुछ इंजेक्शन से भी आराम मिलता है।

साइलेंट अटैक -
हार्ट अटैक यानि दिल के दौरे के दौरान आमतौर पर लक्षण आधे घंटे तक रहते हैं। आराम करने या दवा खाने से राहत नहीं मिलती है। मामूली दर्द से गंभीर पीड़ा तक हो सकती है। कई लोगों में हार्ट अटैक के लक्षण नहीं दिखते हैं जिसे साइलेंट मायोकार्डियल इन्फेक्शन यानि एमआई कहते हैं। ये ज्यादातर डायबिटीज के मरीजों में होता है।

कार्डियक अरेस्ट-
ये हार्ट की ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय एकदम से काम करना बंद कर देता है। व्यक्ति बेहोश हो जाता है। तत्काल उपचार न मिलने पर कुछ मिनटों में जान भी जा सकती है। इसका कारण हृदय की धमनियों में पूरी तरह ब्लॉकेज आकर हार्टअटैक आना है। प्रारंभिक उपचार के लिए व्यक्ति के सीने में कंप्रेशन और मुंह के माध्यम से सांस दी जाती है।



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सीढ़ियां चढ़ते हुए सांस फूलती है तो हो सकता है घातक, जानें इसके बारे में

हृदयाघात-

सीढ़ियां चढ़ते वक्त सांस फूलती है तो सावधान हो जाएं। रक्त वाहिकाओं में ब्लॉकेज से हृदय तक रक्त नहीं पहुंचने से हृदयघात होता है। एक दम से सीने में तेज दर्द, सांस फूलने, पसीना आने पर तुरंत अस्पताल ले जाएं। गोल्डन आवर ट्रीटमेंट से 80% मरीज बच सकते हैं। डिस्प्रिन दें, ईसीजी कराएं। कुछ इंजेक्शन से भी आराम मिलता है।

साइलेंट अटैक -
हार्ट अटैक यानि दिल के दौरे के दौरान आमतौर पर लक्षण आधे घंटे तक रहते हैं। आराम करने या दवा खाने से राहत नहीं मिलती है। मामूली दर्द से गंभीर पीड़ा तक हो सकती है। कई लोगों में हार्ट अटैक के लक्षण नहीं दिखते हैं जिसे साइलेंट मायोकार्डियल इन्फेक्शन यानि एमआई कहते हैं। ये ज्यादातर डायबिटीज के मरीजों में होता है।

कार्डियक अरेस्ट-
ये हार्ट की ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय एकदम से काम करना बंद कर देता है। व्यक्ति बेहोश हो जाता है। तत्काल उपचार न मिलने पर कुछ मिनटों में जान भी जा सकती है। इसका कारण हृदय की धमनियों में पूरी तरह ब्लॉकेज आकर हार्टअटैक आना है। प्रारंभिक उपचार के लिए व्यक्ति के सीने में कंप्रेशन और मुंह के माध्यम से सांस दी जाती है।

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