google.com, pub-5031399508792770, DIRECT, f08c47fec0942fa0 नवजात की सेहत के लिए अहम पहला साल - Ayurveda And Gharelu Vaidya Happy Diwali 2018

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नवजात की सेहत के लिए अहम पहला साल

डाइट: 6 माह तक रेगुलर ब्रेस्टफीडिंग
जन्म के बाद शिशु के दिमागी विकास के लिए शुरू के दो साल तक शरीर में पौष्टिक तत्त्वों (आयरन, विटामिन-ए व डी, प्रोटीन) की ज्यादा जरूरत होती है। नवजात का सामान्य वजन ढाई से चार किलो के बीच होना चाहिए। इससे कम होने पर उसके शरीर में हर तरह के न्यूट्रिएंट्स की पूर्ति होना जरूरी है। उसे रेगुलर 6 माह तक मां का दूध दिया जाना चाहिए। इसके बाद फल, उबली सब्जियों को मैश कर या दलिया खिला सकते हैं।
बचाव: सावधानी बरतें
कई बार नवजात मेटाबॉलिक डिसऑर्डर (शरीर में कुछ खास एंजाइम्स, अमीनो एसिड या किसी अहम तत्त्व की कमी), कमजोर दिमागी क्षमता या शारीरिक संरचना से जुड़ी समस्या के साथ पैदा होता है। ऐसे में शुरुआत से ही डॉक्टरी सलाह अहम है ताकि दिक्कत भविष्य में गंभीर रूप न ले सके। कमजोर इम्युनिटी के साथ जन्में बच्चों को मौसमी रोगों का खतरा अधिक रहता है जिनसे बचाव ही एकमात्र उपचार है।
टीकाकरण : इम्युनिटी बढ़ाती वैक्सीन
जन्म से एक साल तक प्रमुख रोगों (पोलियो, चिकनपॉक्स, कूकरखांसी, निमोनिया, ट्यूबरक्लोसिस, डिप्थीरिया और टिटनस) के प्रति प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने और शरीर को मजबूत करने के लिए बच्चे का वैक्सीनेशन होना चाहिए।
कब कौनसा टीका जरूरी
जन्म के समय: हेपेटाइटिस-बी की पहली खुराक, बीसीजी और ओरल पोलियो वैक्सीन।
6-14 हफ्ते के बीच: डीपीटी, हेपेटाइटिस-बी की दूसरी खुराक, पोलियो, हिब और रोटावायरस वैक्सीन।
छठा महीना: हेपेटाइटिस-बी की तीसरी खुराक और पोलियो वैक्सीन।
नवा महीना: खसरा से बचाव के लिए एमएमआर और पोलियो की अन्य खुराक।
9-12 माह: टायफॉइड वैक्सीन और हेपेटाइटिस-ए।
ऐसी हो डाइट
छह माह की उम्र तक केवल बे्रस्टमिल्क शरीर में हर तत्त्व की पूर्ति कर रोग प्रतिरोधक क्षमता, हड्डियों व मांसपेशियों को मजबूत करता है। छह माह के बाद दाल या उबली दाल का पानी, दूध, दही, पनीर खिलाकर प्रोटीन की पूर्ति कर सकते हैं। इसके अलावा उसे कम मीठी चावल और दूध की खीर, मैश किया हुआ केला, पपीता, सेब आदि भी खाने को दें। दलिया, खिचड़ी भी उनके लिए पौष्टिक रहेंगे। भीगी हुई दाल को पीसकर बना पेस्ट शिशु की हड्डियों की मजबूती के लिए मददगार होगा। शारीरिक विकास के लिए गोभी, गाजर, टमाटर, पालक आदि को उबालकर बनाया गया सूप भी हैल्दी डाइट है।
बेबी केयर
कमजोर इम्युनिटी की वजह से नवजात पर विभिन्न तरह के कीटाणुओं के हमले की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में बच्चे को छूने या गोद में लेने से पहले हाथों को साफ रखें।
बच्चे के शरीर की मांसपेशी और हड्डियां काफी नाजुक होती हैं इसलिए गोद में लेने उठाने, लिटाने आदि से पहले उसकी गर्दन, सिर और कमर पर सपोर्ट जरूर दें।
-डॉ. एन.बी.राजोरिया, शिशु रोग विशेषज्ञ



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नवजात की सेहत के लिए अहम पहला साल

डाइट: 6 माह तक रेगुलर ब्रेस्टफीडिंग
जन्म के बाद शिशु के दिमागी विकास के लिए शुरू के दो साल तक शरीर में पौष्टिक तत्त्वों (आयरन, विटामिन-ए व डी, प्रोटीन) की ज्यादा जरूरत होती है। नवजात का सामान्य वजन ढाई से चार किलो के बीच होना चाहिए। इससे कम होने पर उसके शरीर में हर तरह के न्यूट्रिएंट्स की पूर्ति होना जरूरी है। उसे रेगुलर 6 माह तक मां का दूध दिया जाना चाहिए। इसके बाद फल, उबली सब्जियों को मैश कर या दलिया खिला सकते हैं।
बचाव: सावधानी बरतें
कई बार नवजात मेटाबॉलिक डिसऑर्डर (शरीर में कुछ खास एंजाइम्स, अमीनो एसिड या किसी अहम तत्त्व की कमी), कमजोर दिमागी क्षमता या शारीरिक संरचना से जुड़ी समस्या के साथ पैदा होता है। ऐसे में शुरुआत से ही डॉक्टरी सलाह अहम है ताकि दिक्कत भविष्य में गंभीर रूप न ले सके। कमजोर इम्युनिटी के साथ जन्में बच्चों को मौसमी रोगों का खतरा अधिक रहता है जिनसे बचाव ही एकमात्र उपचार है।
टीकाकरण : इम्युनिटी बढ़ाती वैक्सीन
जन्म से एक साल तक प्रमुख रोगों (पोलियो, चिकनपॉक्स, कूकरखांसी, निमोनिया, ट्यूबरक्लोसिस, डिप्थीरिया और टिटनस) के प्रति प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने और शरीर को मजबूत करने के लिए बच्चे का वैक्सीनेशन होना चाहिए।
कब कौनसा टीका जरूरी
जन्म के समय: हेपेटाइटिस-बी की पहली खुराक, बीसीजी और ओरल पोलियो वैक्सीन।
6-14 हफ्ते के बीच: डीपीटी, हेपेटाइटिस-बी की दूसरी खुराक, पोलियो, हिब और रोटावायरस वैक्सीन।
छठा महीना: हेपेटाइटिस-बी की तीसरी खुराक और पोलियो वैक्सीन।
नवा महीना: खसरा से बचाव के लिए एमएमआर और पोलियो की अन्य खुराक।
9-12 माह: टायफॉइड वैक्सीन और हेपेटाइटिस-ए।
ऐसी हो डाइट
छह माह की उम्र तक केवल बे्रस्टमिल्क शरीर में हर तत्त्व की पूर्ति कर रोग प्रतिरोधक क्षमता, हड्डियों व मांसपेशियों को मजबूत करता है। छह माह के बाद दाल या उबली दाल का पानी, दूध, दही, पनीर खिलाकर प्रोटीन की पूर्ति कर सकते हैं। इसके अलावा उसे कम मीठी चावल और दूध की खीर, मैश किया हुआ केला, पपीता, सेब आदि भी खाने को दें। दलिया, खिचड़ी भी उनके लिए पौष्टिक रहेंगे। भीगी हुई दाल को पीसकर बना पेस्ट शिशु की हड्डियों की मजबूती के लिए मददगार होगा। शारीरिक विकास के लिए गोभी, गाजर, टमाटर, पालक आदि को उबालकर बनाया गया सूप भी हैल्दी डाइट है।
बेबी केयर
कमजोर इम्युनिटी की वजह से नवजात पर विभिन्न तरह के कीटाणुओं के हमले की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में बच्चे को छूने या गोद में लेने से पहले हाथों को साफ रखें।
बच्चे के शरीर की मांसपेशी और हड्डियां काफी नाजुक होती हैं इसलिए गोद में लेने उठाने, लिटाने आदि से पहले उसकी गर्दन, सिर और कमर पर सपोर्ट जरूर दें।
-डॉ. एन.बी.राजोरिया, शिशु रोग विशेषज्ञ

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