google.com, pub-5031399508792770, DIRECT, f08c47fec0942fa0 महिलाओं के तमाम रोगों को दूर करेंगे ये पांच योगासन - Ayurveda And Gharelu Vaidya Happy Diwali 2018

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महिलाओं के तमाम रोगों को दूर करेंगे ये पांच योगासन

अच्छी सेहत के लिए योग करना बहुत जरूरी है । अगर आप चाहते हैं कि शरीर स्वस्थ रहे तो नियमित योग करें। योग करने से कई बीमारियां से बचा जा सकता है बल्कि कई बीमारियों में जल्द राहत भी मिलती है। महिलाएं काम की वजह से अपनी सेहत पर ध्यान नहीं दे पातीं अगर वो कुछ समय निकाल कर सिर्फ योग ही करती रहें तो शरीर जवान और स्वस्थ रहेगा। कुछ योग ऐसे हैं जिनको करने से सेहत को फायदा होगा। जानिए इनके बारे में।

मार्जारी आसन -
मार्जरी” शब्द का अर्थ “बिल्ली” होता है और “आसन” का अर्थ “मुद्रा या स्थिति” होता है। इस आसन को करने वाला व्यक्ति एक बिल्ली के समान दिखाई देता है। इसको करने से रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों का लचीलापन बना रहता है। इसके साथ यह पीठ दर्द और गर्दन दर्द में राहत दिलाता है। इसको 8-10 बार करना होता है। इससे पेट की चर्बी कम होती है। कब्ज में राहत मिलती है। कमर, गर्दन और मेरूदंड लचीले होते हैं। महिलाओं के लिए लाभकारी आसन है। रीढ़ की हड्डी और कमर में दर्द है तो ये आसन न करें।

कंधरासन -
कंधरासन एक योग है | जिसमें कंध = कंधा , आसन = मुद्रा मतलब इसको करने से कंधों पर जोर पड़ता है, इसलिए इसे कंधरासन कहते हैं। इसको ५-१० बार करना चाहिए। यह आसन प्रजनन अंगों को मजबूत बनाता है। इससे अनियमित माहवारी व गर्भपात का खतरा टलता है। रीढ़ की हड्डी से संबंधी बीमारियों में बचाव होता है। गंभीर पेट के रोगी, हर्निया और गर्दन दर्द के रोगी इस आसन को करने से बचें। जिन लोगों को पीठ दर्द और स्पाइनल ***** के सरकने की समस्या होती है, उनके लिए कंधरासन का अभ्यास करना काफी लाभदायक होता है|

शशांकासन -
शशक का का अर्थ होता है खरगोश। इस आसन को करते वक्त व्यक्ति की खरगोश जैसी आकृति बन जाती है इसीलिए इसे शशकासन कहते हैं। इस आसन को करने के लिए खरगोश की तरह बैठना होता है। एक बार में 10-12 बार कर सकते हैं। इससे उदर संबंधी बीमारियों से बचाव होता है। महिलाओं के बस्ति प्रदेश को लाभ, प्रजनन अंग स्वस्थ और मानसिक विकार दूर होते हैं। बीपी और स्लिप ***** के रोगी इसे न करें। हृदय रोगियों के लिए यह आसन लाभदायक है। यह आसन पेट, कमर व कूल्हों की चर्बी कम करके आंत, यकृत, अग्न्याशय व गुर्दों को बल प्रदान करता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से तनाव, क्रोध, चिड़चिड़ापन आदि मानसिक रोग भी दूर हो जाते हैं।

नौकासन -
नौकासन योग करते समय हमारे शरीर का आकार नौका यानि नाव के समान रहता है इसीलिए इस योग को नौकासन कहते हैं। इसको एक बार में ५-६ बार तक कर सकते हैं। इसेकरने से महिलाओं को ओवेरी (बच्चादानी) और यूट्रस (गर्भाशय) की समस्याओं में राहत मिलती है। प्रसव के बाद की चर्बी भी घटती है। पीठ और आंत मजबूत होते। हाल ही सर्जरी व रीढ़ की हड्डी में समस्या वाले न करें। वजन को नियंत्रित करने तथा पेट की चर्बी कम करने और कमरदर्द को कम करने के लिए यह एक उपयोगी योगासन हैं।

गोमुखासन -
गोमुखासन यह योग करते समय शरीर का आकार गाय के मुख के समान होने के कारण इसे 'गोमुखासन' कहा जाता हैं। गोमुखासन महिलाओ के लिए अधिक फायदेमंद माना जाता हैं। इसको करने से मधुमेह, गठिया, कब्ज, पीठ दर्द जैसी कई समस्याओं में तुरंत राहत मिलती है। इससे छाती व कंधा मजबूत होते हैं। गोमुखासन को बवासीर के रोगी न करें। इससे उनकी समस्या बढ़ सकती है।



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महिलाओं के तमाम रोगों को दूर करेंगे ये पांच योगासन

अच्छी सेहत के लिए योग करना बहुत जरूरी है । अगर आप चाहते हैं कि शरीर स्वस्थ रहे तो नियमित योग करें। योग करने से कई बीमारियां से बचा जा सकता है बल्कि कई बीमारियों में जल्द राहत भी मिलती है। महिलाएं काम की वजह से अपनी सेहत पर ध्यान नहीं दे पातीं अगर वो कुछ समय निकाल कर सिर्फ योग ही करती रहें तो शरीर जवान और स्वस्थ रहेगा। कुछ योग ऐसे हैं जिनको करने से सेहत को फायदा होगा। जानिए इनके बारे में।

मार्जारी आसन -
मार्जरी” शब्द का अर्थ “बिल्ली” होता है और “आसन” का अर्थ “मुद्रा या स्थिति” होता है। इस आसन को करने वाला व्यक्ति एक बिल्ली के समान दिखाई देता है। इसको करने से रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों का लचीलापन बना रहता है। इसके साथ यह पीठ दर्द और गर्दन दर्द में राहत दिलाता है। इसको 8-10 बार करना होता है। इससे पेट की चर्बी कम होती है। कब्ज में राहत मिलती है। कमर, गर्दन और मेरूदंड लचीले होते हैं। महिलाओं के लिए लाभकारी आसन है। रीढ़ की हड्डी और कमर में दर्द है तो ये आसन न करें।

कंधरासन -
कंधरासन एक योग है | जिसमें कंध = कंधा , आसन = मुद्रा मतलब इसको करने से कंधों पर जोर पड़ता है, इसलिए इसे कंधरासन कहते हैं। इसको ५-१० बार करना चाहिए। यह आसन प्रजनन अंगों को मजबूत बनाता है। इससे अनियमित माहवारी व गर्भपात का खतरा टलता है। रीढ़ की हड्डी से संबंधी बीमारियों में बचाव होता है। गंभीर पेट के रोगी, हर्निया और गर्दन दर्द के रोगी इस आसन को करने से बचें। जिन लोगों को पीठ दर्द और स्पाइनल ***** के सरकने की समस्या होती है, उनके लिए कंधरासन का अभ्यास करना काफी लाभदायक होता है|

शशांकासन -
शशक का का अर्थ होता है खरगोश। इस आसन को करते वक्त व्यक्ति की खरगोश जैसी आकृति बन जाती है इसीलिए इसे शशकासन कहते हैं। इस आसन को करने के लिए खरगोश की तरह बैठना होता है। एक बार में 10-12 बार कर सकते हैं। इससे उदर संबंधी बीमारियों से बचाव होता है। महिलाओं के बस्ति प्रदेश को लाभ, प्रजनन अंग स्वस्थ और मानसिक विकार दूर होते हैं। बीपी और स्लिप ***** के रोगी इसे न करें। हृदय रोगियों के लिए यह आसन लाभदायक है। यह आसन पेट, कमर व कूल्हों की चर्बी कम करके आंत, यकृत, अग्न्याशय व गुर्दों को बल प्रदान करता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से तनाव, क्रोध, चिड़चिड़ापन आदि मानसिक रोग भी दूर हो जाते हैं।

नौकासन -
नौकासन योग करते समय हमारे शरीर का आकार नौका यानि नाव के समान रहता है इसीलिए इस योग को नौकासन कहते हैं। इसको एक बार में ५-६ बार तक कर सकते हैं। इसेकरने से महिलाओं को ओवेरी (बच्चादानी) और यूट्रस (गर्भाशय) की समस्याओं में राहत मिलती है। प्रसव के बाद की चर्बी भी घटती है। पीठ और आंत मजबूत होते। हाल ही सर्जरी व रीढ़ की हड्डी में समस्या वाले न करें। वजन को नियंत्रित करने तथा पेट की चर्बी कम करने और कमरदर्द को कम करने के लिए यह एक उपयोगी योगासन हैं।

गोमुखासन -
गोमुखासन यह योग करते समय शरीर का आकार गाय के मुख के समान होने के कारण इसे 'गोमुखासन' कहा जाता हैं। गोमुखासन महिलाओ के लिए अधिक फायदेमंद माना जाता हैं। इसको करने से मधुमेह, गठिया, कब्ज, पीठ दर्द जैसी कई समस्याओं में तुरंत राहत मिलती है। इससे छाती व कंधा मजबूत होते हैं। गोमुखासन को बवासीर के रोगी न करें। इससे उनकी समस्या बढ़ सकती है।

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