कोविड-19 वायरस के बारे में शोधकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह लोगों के बीच कैसे फैला। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि यह वायरस छींकने या खांसने के जरिए फैलता है जैसे आम सर्दी्र-जुकाम फैलता है। हालांकि शोधकर्ताओं का एक समूह इस पर पूरी तरह से सहमत नहीं है। कुछ शोधकर्ताओं का तर्क है कि प्रारंभिक साक्ष्य यह बताते हैं कि यह वायरस कणों में फैलता है जो एरोसोल के रूप में पहचाने जाने वाली बूंदों से भी छोटा होता है जिनका व्यास 5 माइक्रोमीटर से भी कम होता है। यानी एक बाल के औसत व्यास से 12 गुना छोटा।
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की एक शोधकर्ता लिडिया बोरूइबा का कहना है कि मानव छींक के पूर्व अध्ययनों के अनुसार कोविड-19 वायरस के कण छींक के जरिए 27 फीट तक फैल सकते हैं। इतना ही नहीं यह संक्रमित मरीजों के अस्पताल के कमरों में वेंटिलेशन सिस्टम में भी मिल सकते हैं। हालांकि जूरी इस बात पर एकमत नहीं है।
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वैज्ञानिक पता लगा रहे कोरोना वायरस हवा से फैला या नहीं
कोविड-19 वायरस के बारे में शोधकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह लोगों के बीच कैसे फैला। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि यह वायरस छींकने या खांसने के जरिए फैलता है जैसे आम सर्दी्र-जुकाम फैलता है। हालांकि शोधकर्ताओं का एक समूह इस पर पूरी तरह से सहमत नहीं है। कुछ शोधकर्ताओं का तर्क है कि प्रारंभिक साक्ष्य यह बताते हैं कि यह वायरस कणों में फैलता है जो एरोसोल के रूप में पहचाने जाने वाली बूंदों से भी छोटा होता है जिनका व्यास 5 माइक्रोमीटर से भी कम होता है। यानी एक बाल के औसत व्यास से 12 गुना छोटा।
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की एक शोधकर्ता लिडिया बोरूइबा का कहना है कि मानव छींक के पूर्व अध्ययनों के अनुसार कोविड-19 वायरस के कण छींक के जरिए 27 फीट तक फैल सकते हैं। इतना ही नहीं यह संक्रमित मरीजों के अस्पताल के कमरों में वेंटिलेशन सिस्टम में भी मिल सकते हैं। हालांकि जूरी इस बात पर एकमत नहीं है।
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