google.com, pub-5031399508792770, DIRECT, f08c47fec0942fa0 जानिए लगभग कितने खर्च में बनेगी एक कोरोना वायरस वैक्सीन - Ayurveda And Gharelu Vaidya Happy Diwali 2018

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जानिए लगभग कितने खर्च में बनेगी एक कोरोना वायरस वैक्सीन

कोरोना वायरस आज पूरी दुनिया के सामने जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद से भी बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। हालांकि यह वायरस अपने परिवार के एक दूसरे सदस्य सार्स से काफी-मिलता-जुलता है बावजूद इसके वैज्ञानिकों को इसकी वैक्सीन बनाने में अबतक कामयाबी नहीं मिल सकी है।

हर्ड इम्युनिटी विकसित होने में अभी समय है लेकिन तब तक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाए रखना भी एक बड़ी चुनौती है। भले से कोरोना वैक्सीन के लिए कुछ कंपनियों ने मानव ट्रायल भी किए हैं लेकिन तब भी इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वे सुरक्षित, प्रभावी और आसानी से स्केलेबल साबित होंगे।

हालांकि पूरी दुनिया के एक साथ वायरस के खिलाफ खड़े होने से आपातकालीन फंडिंग बढ़ी है, वैज्ञानिक और शोधकर्ता कड़ी मेहनत से अपेक्षाकृत तेज वैक्सीन विकसित कर सकते हैं। लेकिन एक टीके को मानव उपयोग के लायक बनाने में आमतौर पर वर्षों का समय लगता है। एक अनुमान के अनुसार एक महामारी संक्रामक रोग की वैक्सीन पाने के लिए प्री-क्लिनिकल स्टेज से बड़े पैमाने पर वैक्सीन के परीक्षण और फिर उत्पादन की लागत लगभग 25 अरब से 35 अरब (319 मिलियन और $469 मिलियन) के बीच आती है। यह लागत और जोखिम कोरोना वायरस में और बढ़ गए हैं क्योंकि सामान्य लंबी और सतर्क प्रक्रिया के लिए अभी वैज्ञानिकों के पास समय नहीं है।

इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी वैश्विक संस्थाओं को इस दिशा में एक आवश्यक कदम वैक्सीन के लिए एक प्रमुख पुरस्कारए या वैक्सीन की खरीद की गारंटी की पेशकश करना बेहतर कदम होगा। इससे वैक्सीन की प्रभावकारिता और सुरक्षा के उचित मानकों में भी सुधार आएगा। गारंटी वाली खरीद जैसी पेशकश वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों की चिंता को भी कम करती है। क्योंकि बड़ी समस्याओं के लिए बड़े प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है। एक नया वैक्सीन रातों-रात नहीं बन सकती लेकिन मौजूदा संकट आवश्यक सुधारों पर आज से ही काम शुरू करने का एक महत्त्वपूर्ण अवसर है।



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जानिए लगभग कितने खर्च में बनेगी एक कोरोना वायरस वैक्सीन

कोरोना वायरस आज पूरी दुनिया के सामने जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद से भी बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। हालांकि यह वायरस अपने परिवार के एक दूसरे सदस्य सार्स से काफी-मिलता-जुलता है बावजूद इसके वैज्ञानिकों को इसकी वैक्सीन बनाने में अबतक कामयाबी नहीं मिल सकी है।

हर्ड इम्युनिटी विकसित होने में अभी समय है लेकिन तब तक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाए रखना भी एक बड़ी चुनौती है। भले से कोरोना वैक्सीन के लिए कुछ कंपनियों ने मानव ट्रायल भी किए हैं लेकिन तब भी इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वे सुरक्षित, प्रभावी और आसानी से स्केलेबल साबित होंगे।

हालांकि पूरी दुनिया के एक साथ वायरस के खिलाफ खड़े होने से आपातकालीन फंडिंग बढ़ी है, वैज्ञानिक और शोधकर्ता कड़ी मेहनत से अपेक्षाकृत तेज वैक्सीन विकसित कर सकते हैं। लेकिन एक टीके को मानव उपयोग के लायक बनाने में आमतौर पर वर्षों का समय लगता है। एक अनुमान के अनुसार एक महामारी संक्रामक रोग की वैक्सीन पाने के लिए प्री-क्लिनिकल स्टेज से बड़े पैमाने पर वैक्सीन के परीक्षण और फिर उत्पादन की लागत लगभग 25 अरब से 35 अरब (319 मिलियन और $469 मिलियन) के बीच आती है। यह लागत और जोखिम कोरोना वायरस में और बढ़ गए हैं क्योंकि सामान्य लंबी और सतर्क प्रक्रिया के लिए अभी वैज्ञानिकों के पास समय नहीं है।

इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी वैश्विक संस्थाओं को इस दिशा में एक आवश्यक कदम वैक्सीन के लिए एक प्रमुख पुरस्कारए या वैक्सीन की खरीद की गारंटी की पेशकश करना बेहतर कदम होगा। इससे वैक्सीन की प्रभावकारिता और सुरक्षा के उचित मानकों में भी सुधार आएगा। गारंटी वाली खरीद जैसी पेशकश वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों की चिंता को भी कम करती है। क्योंकि बड़ी समस्याओं के लिए बड़े प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है। एक नया वैक्सीन रातों-रात नहीं बन सकती लेकिन मौजूदा संकट आवश्यक सुधारों पर आज से ही काम शुरू करने का एक महत्त्वपूर्ण अवसर है।

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