देश और दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण को खत्म करने वाली दवा और वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार है। लेकिन अभी तक दुनिया का कोई भी देश इसमें सफल नहीं हो सका है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) का कहना है कि भारत भी वैक्सीन बनाने की कोशिश में जुटा है लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है। आईसीएमआर के अनुसार देश में 40 से अधिक वैक्सीन पर काम चल रहा है, लेकिन अभी तक कोई अगले स्टेज में नहीं पहुंच सकी है।
भारत के 20 संस्थान भी मुहिम में शामिल -
भारत में भी कई शोध और उच्च शिक्षा संस्थान वैक्सीन विकसित करने में जुटे हुए हैं। इसमें पुणे स्थित नेशनल वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और आईआईटी कानपुर समेत कई शीर्ष संस्थान शामिल हैं। हैदराबाद की कंपनी इंडियन इम्यूनिलॉजिकल्स ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर वैक्सीन तैयार करने में जुटी हुई है। वहीं प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने सितंबर तक वैक्सीन तैयार करने का दावा किया है। संस्थान की विषाणु विभाग प्रोफेसर सारा गिल्बर्ट ने कहा कि 80 फीसदी उम्मीद है कि यह टीका कारगर साबित होगा। इसका मानवीय परीक्षण जल्द ही शुरू होगा। संस्थान के मुताबिक कोविड-19 के 80 से 90 फीसदी आनुवंशिक कोड सार्स वायरस से मेल खाते हैं, इसलिए इसका टीका तैयार होने में देर नहीं लगेगी।
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देश में 40 से अधिक कोरोना वायरस वैक्सीन पर चल रहा काम
देश और दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण को खत्म करने वाली दवा और वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार है। लेकिन अभी तक दुनिया का कोई भी देश इसमें सफल नहीं हो सका है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) का कहना है कि भारत भी वैक्सीन बनाने की कोशिश में जुटा है लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है। आईसीएमआर के अनुसार देश में 40 से अधिक वैक्सीन पर काम चल रहा है, लेकिन अभी तक कोई अगले स्टेज में नहीं पहुंच सकी है।
भारत के 20 संस्थान भी मुहिम में शामिल -
भारत में भी कई शोध और उच्च शिक्षा संस्थान वैक्सीन विकसित करने में जुटे हुए हैं। इसमें पुणे स्थित नेशनल वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और आईआईटी कानपुर समेत कई शीर्ष संस्थान शामिल हैं। हैदराबाद की कंपनी इंडियन इम्यूनिलॉजिकल्स ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर वैक्सीन तैयार करने में जुटी हुई है। वहीं प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने सितंबर तक वैक्सीन तैयार करने का दावा किया है। संस्थान की विषाणु विभाग प्रोफेसर सारा गिल्बर्ट ने कहा कि 80 फीसदी उम्मीद है कि यह टीका कारगर साबित होगा। इसका मानवीय परीक्षण जल्द ही शुरू होगा। संस्थान के मुताबिक कोविड-19 के 80 से 90 फीसदी आनुवंशिक कोड सार्स वायरस से मेल खाते हैं, इसलिए इसका टीका तैयार होने में देर नहीं लगेगी।