शरीर से पसीना निकलना एक सामान्य प्रक्रिया है जो कि हमारे जन्म के समय से ही शुरू हो जाती है। लेकिन कई बार जरूरत से ज्यादा पसीना आने और दुर्गंध के कारण यह प्रक्रिया लोगों के लिए एक समस्या बन जाती है जिसे हाइपर हाइड्रोसिस कहते हैं। कई बार भारी भरकम व्यायाम के कारण भी अंडर आम्र्स, हाथ और पैरों से ज्यादा पसीना आता है। इसके अलावा थायरॉइड, मलेरिया, डायबिटीज, पीरियड्स और मेनोपॉज के कारण भी व्यक्ति विशेष को ज्यादा पसीना आ सकता है। एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति में इस समस्या को दूर करने के लिए कुछ विशेष उपाय प्रयोग में लाए जाते हैं। आइए जानते हैं उनके बारे में।
यूं करे हथेली-तलवों की मसाज -
अपने एक हाथ से दूसरे हाथ की हथेली के ऊपरी हिस्से पर मालिश करें। इसी तरह अपने तलवों पर हाथ से मालिश करें। ऐसा दिन में दो से तीन बार करें और हर बार इस क्रिया को कम से कम 20 सेकंड तक करने से लाभ होगा।
दो से तीन सप्ताह तक यह प्रयोग करने से ज्यादा पसीना आने और बदबू की समस्या दूर हो जाती है। आप इन पसीने की ग्रंथियों पर मुल्तानी मिट्टी के पाउडर की मसाज भी कर सकते हैं।
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इस खास तरीके से पाएं पसीने की दुर्गंध से छुटकारा
शरीर से पसीना निकलना एक सामान्य प्रक्रिया है जो कि हमारे जन्म के समय से ही शुरू हो जाती है। लेकिन कई बार जरूरत से ज्यादा पसीना आने और दुर्गंध के कारण यह प्रक्रिया लोगों के लिए एक समस्या बन जाती है जिसे हाइपर हाइड्रोसिस कहते हैं। कई बार भारी भरकम व्यायाम के कारण भी अंडर आम्र्स, हाथ और पैरों से ज्यादा पसीना आता है। इसके अलावा थायरॉइड, मलेरिया, डायबिटीज, पीरियड्स और मेनोपॉज के कारण भी व्यक्ति विशेष को ज्यादा पसीना आ सकता है। एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति में इस समस्या को दूर करने के लिए कुछ विशेष उपाय प्रयोग में लाए जाते हैं। आइए जानते हैं उनके बारे में।
यूं करे हथेली-तलवों की मसाज -
अपने एक हाथ से दूसरे हाथ की हथेली के ऊपरी हिस्से पर मालिश करें। इसी तरह अपने तलवों पर हाथ से मालिश करें। ऐसा दिन में दो से तीन बार करें और हर बार इस क्रिया को कम से कम 20 सेकंड तक करने से लाभ होगा।
दो से तीन सप्ताह तक यह प्रयोग करने से ज्यादा पसीना आने और बदबू की समस्या दूर हो जाती है। आप इन पसीने की ग्रंथियों पर मुल्तानी मिट्टी के पाउडर की मसाज भी कर सकते हैं।