google.com, pub-5031399508792770, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Yoga Benefits For Health: 72 हजार नाड़ियों को शुद्ध करता है नाड़ी शोधन प्राणायाम - Ayurveda And Gharelu Vaidya Happy Diwali 2018

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Yoga Benefits For Health: 72 हजार नाड़ियों को शुद्ध करता है नाड़ी शोधन प्राणायाम

आयुर्वेद के कई योग संबंधी ग्रंथों में 72 हजार नाड़ियों को शुद्ध करने के लिए नाड़ी शोधन प्राणायाम का वर्णन है। किसी भी प्राणायाम को शुरू करने से पहले इसे करना उपयोगी है। सूर्याेदय से पहले इसका अभ्यास एकांत और खुले वातारण में करना चाहिए। क्योंकि इस समय वातावरण में शुद्ध हवा मौजूद होती है जो मुंह से होते हुए फेफड़ों तक जाती है और यहां से हृदय के जरिए रक्त में मिलकर हर अंग तक पहुंचती है। साथ ही भस्त्रिका व अग्निसार जैसे प्राणायाम हृदय की पंपिंग बढ़ाकर इसकी कार्यक्षमता बढ़ाते हैं। जानते हैं इस प्राणायाम के बारे में-

ऐसे करें :
सुखासन की मुद्रा में सीधे बैठकर आंखें बंद कर लें। दाएं हाथ के अंगूठे से दाएं नथुने को बंद कर पूरी सांस बाहर निकालें। अब बाएं नथुने से सांस लें, मध्यमा अंगुली से बाएं नथुने को बंद कर कुछ देर सांस को क्षमतानुसार अंदर रोक कर रखें। फिर दायां अंगूठा हटाकर सांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। 1-2 सेकंड सांस को बाहर छोड़ें। इस प्रक्रिया को दाएं नथुने से भी दोहराएं। इस एक चक्र को 5-7 मिनट करें। इसे खाली पेट करें। इसे करने के दौरान मुंह से सांस न लें। जल्दबाजी न करें।

विशेष लाभ:
इस प्राणायाम के अभ्यास के दौरान सांस लेने में जितना समय लगता है, उससे अधिक समय सांस रोकने और छोड़ने में लगता है। सांस लेते समय सांस की गति इतनी धीमी होनी चाहिए कि सांस लेने की आवाज स्वयं को आए। सुविधा के लिए आप शुरुआत में 1:1:1 के अनुपात में सांस लें, रोकें और छोड़ें। कुछ समय बाद नियमित अभ्यास के आधार पर इस अनुपात को 1:2:2 और फिर 1:4:2 कर सकते हैं। इससे फेफड़े मजबूत बनेंगे।

माना जाता है कि यदि व्यक्ति का हृदय स्वस्थ है तो वह हर तरह से स्वस्थ है। लेकिन सांस लेने में तकलीफ, भारीपन महसूस होना या थोड़ा-सा काम करते ही थक जाना हृदय पर पड़ने वाले दबाव की ओर इशारा करता है। ऐसे में नाड़ीशोधन प्राणायाम हृदय को दुरुस्त रखता है।



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Yoga Benefits For Health: 72 हजार नाड़ियों को शुद्ध करता है नाड़ी शोधन प्राणायाम

आयुर्वेद के कई योग संबंधी ग्रंथों में 72 हजार नाड़ियों को शुद्ध करने के लिए नाड़ी शोधन प्राणायाम का वर्णन है। किसी भी प्राणायाम को शुरू करने से पहले इसे करना उपयोगी है। सूर्याेदय से पहले इसका अभ्यास एकांत और खुले वातारण में करना चाहिए। क्योंकि इस समय वातावरण में शुद्ध हवा मौजूद होती है जो मुंह से होते हुए फेफड़ों तक जाती है और यहां से हृदय के जरिए रक्त में मिलकर हर अंग तक पहुंचती है। साथ ही भस्त्रिका व अग्निसार जैसे प्राणायाम हृदय की पंपिंग बढ़ाकर इसकी कार्यक्षमता बढ़ाते हैं। जानते हैं इस प्राणायाम के बारे में-

ऐसे करें :
सुखासन की मुद्रा में सीधे बैठकर आंखें बंद कर लें। दाएं हाथ के अंगूठे से दाएं नथुने को बंद कर पूरी सांस बाहर निकालें। अब बाएं नथुने से सांस लें, मध्यमा अंगुली से बाएं नथुने को बंद कर कुछ देर सांस को क्षमतानुसार अंदर रोक कर रखें। फिर दायां अंगूठा हटाकर सांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। 1-2 सेकंड सांस को बाहर छोड़ें। इस प्रक्रिया को दाएं नथुने से भी दोहराएं। इस एक चक्र को 5-7 मिनट करें। इसे खाली पेट करें। इसे करने के दौरान मुंह से सांस न लें। जल्दबाजी न करें।

विशेष लाभ:
इस प्राणायाम के अभ्यास के दौरान सांस लेने में जितना समय लगता है, उससे अधिक समय सांस रोकने और छोड़ने में लगता है। सांस लेते समय सांस की गति इतनी धीमी होनी चाहिए कि सांस लेने की आवाज स्वयं को आए। सुविधा के लिए आप शुरुआत में 1:1:1 के अनुपात में सांस लें, रोकें और छोड़ें। कुछ समय बाद नियमित अभ्यास के आधार पर इस अनुपात को 1:2:2 और फिर 1:4:2 कर सकते हैं। इससे फेफड़े मजबूत बनेंगे।

माना जाता है कि यदि व्यक्ति का हृदय स्वस्थ है तो वह हर तरह से स्वस्थ है। लेकिन सांस लेने में तकलीफ, भारीपन महसूस होना या थोड़ा-सा काम करते ही थक जाना हृदय पर पड़ने वाले दबाव की ओर इशारा करता है। ऐसे में नाड़ीशोधन प्राणायाम हृदय को दुरुस्त रखता है।

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