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क्रिएटिनिन टैस्ट से जान सकते हैं किडनी की कार्यक्षमता के बारे में

किडनी हार्मोन बनाने व शरीर से लगभग 110 प्रकार के विषैले तत्त्वों को बाहर निकालती है। इन तत्त्वों की मात्रा बढ़ने पर ब्लड में क्रिएटिनिन की मात्रा भी बढ़ती है जो दर्शाता है कि किडनी ठीक से काम नहीं कर रही। क्रिएटिनिन ब्लड टैस्ट, अंग की कार्यक्षमता बताता है।

क्या है क्रिएटिनिन -
शरीर में मौजूद क्रिएटिन नामक मेटाबॉलिक पदार्थ भोजन को ऊर्जा में बदलते समय क्रिएटिनिन (अपशिष्ट पदार्थ) में बदल जाता है। स्वस्थ किडनी क्रिएटिनिन को यूरिन के रास्ते बाहर निकालती है। लेकिन प्रोटीन की अधिकता, पानी की कमी, रक्तसंचार में रुकावट व शुगर लेवल के बढ़ने से किडनी क्रिएटिनिन को बाहर नहीं निकाल पाती जो किडनी के खराब होने की ओर इशारा करता है। इसकी मात्रा बढऩे से यह बाहर न निकलकर ब्लड में मिलकर इसे दूषित कर देती है। क्रिएटिनिन की सामान्य मात्रा पुरुषों में 0.7 से 1.3 व महिलाओं में 0.6 से 1.1 मिग्रा प्रति डेसिलीटर होनी चाहिए। इससे अधिक होने पर डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आशंका रहती है।

कब पड़ती जरूरत -
भूख न लगने, हाथ-पैरों या पेट के निचले हिस्से में सूजन, कमर के निचले हिस्से में लगातार दर्द होने, सामान्य से अधिक या ज्यादा यूरिन आना, हाई ब्लड प्रेशर, उल्टी या अनिद्रा की शिकायत होने पर विशेषज्ञ क्रिएटिनिन टैस्ट करवाने की सलाह देते हैं। इस टैस्ट में कुछ लैब टैस्ट जैसे ब्लड यूरिया नाइट्रोजन (बीयूएन), बेसिक मेटाबॉलिक पैनल (बीएमपी) और कॉम्प्रिहेंसिव मेटाबॉलिक पैनल (सीएमपी) भी शामिल हैं। इनसे रोग व उसके कारण का पता चल जाता है। 45साल से अधिक उम्र के लोगों को वर्ष में एक बार यह टैस्ट रुटीन चैकअप के दौरान करवाना चाहिए। इसके अलावा डॉक्टरी सलाह से पथरी, डायबिटीज व हाई ब्लड प्रेशर के मरीज व लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स लेने वालों को यह टैस्ट करवाना चाहिए।

सैम्पल देते समय सावधानी -
ब्लड (2-3 एमएल) सैंपल देने से एक घंटा पहले खूब पानी पीएं। कोई दवा लेते हैं तो डॉक्टर को जरूर बताएं। आधे घंटे में रिपोर्ट मिल जाती है।



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क्रिएटिनिन टैस्ट से जान सकते हैं किडनी की कार्यक्षमता के बारे में

किडनी हार्मोन बनाने व शरीर से लगभग 110 प्रकार के विषैले तत्त्वों को बाहर निकालती है। इन तत्त्वों की मात्रा बढ़ने पर ब्लड में क्रिएटिनिन की मात्रा भी बढ़ती है जो दर्शाता है कि किडनी ठीक से काम नहीं कर रही। क्रिएटिनिन ब्लड टैस्ट, अंग की कार्यक्षमता बताता है।

क्या है क्रिएटिनिन -
शरीर में मौजूद क्रिएटिन नामक मेटाबॉलिक पदार्थ भोजन को ऊर्जा में बदलते समय क्रिएटिनिन (अपशिष्ट पदार्थ) में बदल जाता है। स्वस्थ किडनी क्रिएटिनिन को यूरिन के रास्ते बाहर निकालती है। लेकिन प्रोटीन की अधिकता, पानी की कमी, रक्तसंचार में रुकावट व शुगर लेवल के बढ़ने से किडनी क्रिएटिनिन को बाहर नहीं निकाल पाती जो किडनी के खराब होने की ओर इशारा करता है। इसकी मात्रा बढऩे से यह बाहर न निकलकर ब्लड में मिलकर इसे दूषित कर देती है। क्रिएटिनिन की सामान्य मात्रा पुरुषों में 0.7 से 1.3 व महिलाओं में 0.6 से 1.1 मिग्रा प्रति डेसिलीटर होनी चाहिए। इससे अधिक होने पर डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आशंका रहती है।

कब पड़ती जरूरत -
भूख न लगने, हाथ-पैरों या पेट के निचले हिस्से में सूजन, कमर के निचले हिस्से में लगातार दर्द होने, सामान्य से अधिक या ज्यादा यूरिन आना, हाई ब्लड प्रेशर, उल्टी या अनिद्रा की शिकायत होने पर विशेषज्ञ क्रिएटिनिन टैस्ट करवाने की सलाह देते हैं। इस टैस्ट में कुछ लैब टैस्ट जैसे ब्लड यूरिया नाइट्रोजन (बीयूएन), बेसिक मेटाबॉलिक पैनल (बीएमपी) और कॉम्प्रिहेंसिव मेटाबॉलिक पैनल (सीएमपी) भी शामिल हैं। इनसे रोग व उसके कारण का पता चल जाता है। 45साल से अधिक उम्र के लोगों को वर्ष में एक बार यह टैस्ट रुटीन चैकअप के दौरान करवाना चाहिए। इसके अलावा डॉक्टरी सलाह से पथरी, डायबिटीज व हाई ब्लड प्रेशर के मरीज व लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स लेने वालों को यह टैस्ट करवाना चाहिए।

सैम्पल देते समय सावधानी -
ब्लड (2-3 एमएल) सैंपल देने से एक घंटा पहले खूब पानी पीएं। कोई दवा लेते हैं तो डॉक्टर को जरूर बताएं। आधे घंटे में रिपोर्ट मिल जाती है।

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