प्रेग्नेंसी में हाई ब्लड प्रेशर को प्री-इक्लेम्पशिया कहते हैं जो कि जच्चा-बच्चा दोनों को प्रभावित करता है। दवाओं व सही खानपान से इसे नियंत्रित कर लिया जाए तो डिलीवरी के बाद अधिकतर मामलों में यह समस्या ठीक हो जाती है।
बढ़ सकती है तकलीफ -
गर्भनाल को कम खून पहुंचता है जिससे गर्भस्थ शिशु का विकास धीमा हो जाता है।
नवजात कमजोर हो सकता है।
बच्चे में जन्मजात विकृतियां हो सकती हैं।
गर्भवती को दौरा पड़ सकता है।
जांच व इलाज -
प्री-इक्लेम्पशिया की जांच के लिए ब्लडप्रेशर के साथ यूरिन व ब्लड की साधारण जांचें होती हैं। इसका शुरुआती लक्षणों के साथ ही इलाज हो जाए तो रोग पर नियंत्रण किया जा सकता है।
रखें खयाल -
प्रेग्नेंसी में रक्तचाप की नियमित जांच कराएं।
नमक का इस्तेमाल कम करें।
व्यायाम करें।
धूम्रपान या शराब से दूरी बनाएं।
बंद कमरे की बजाय खुले में व्यायाम करें जैसे वॉक या जॉगिंग आदि।
तनाव न लें।
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प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर की समस्या के बारे में जानें
प्रेग्नेंसी में हाई ब्लड प्रेशर को प्री-इक्लेम्पशिया कहते हैं जो कि जच्चा-बच्चा दोनों को प्रभावित करता है। दवाओं व सही खानपान से इसे नियंत्रित कर लिया जाए तो डिलीवरी के बाद अधिकतर मामलों में यह समस्या ठीक हो जाती है।
बढ़ सकती है तकलीफ -
गर्भनाल को कम खून पहुंचता है जिससे गर्भस्थ शिशु का विकास धीमा हो जाता है।
नवजात कमजोर हो सकता है।
बच्चे में जन्मजात विकृतियां हो सकती हैं।
गर्भवती को दौरा पड़ सकता है।
जांच व इलाज -
प्री-इक्लेम्पशिया की जांच के लिए ब्लडप्रेशर के साथ यूरिन व ब्लड की साधारण जांचें होती हैं। इसका शुरुआती लक्षणों के साथ ही इलाज हो जाए तो रोग पर नियंत्रण किया जा सकता है।
रखें खयाल -
प्रेग्नेंसी में रक्तचाप की नियमित जांच कराएं।
नमक का इस्तेमाल कम करें।
व्यायाम करें।
धूम्रपान या शराब से दूरी बनाएं।
बंद कमरे की बजाय खुले में व्यायाम करें जैसे वॉक या जॉगिंग आदि।
तनाव न लें।