google.com, pub-5031399508792770, DIRECT, f08c47fec0942fa0 बच्चे स्कूल में भी रहें फिट एंड कूल - Ayurveda And Gharelu Vaidya Happy Diwali 2018

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बच्चे स्कूल में भी रहें फिट एंड कूल

सर्दी, जुकाम, पेट खराब, जूएं जैसी संक्रमण वाली बीमारियों से बच्चों का सबसे ज्यादा सामना स्कूल जाने के दौरान ही होता है। इसकी मुख्य वजह होती है हाइजीन का ख्याल न रखना और एक-दूसरे के संपर्क में आकर बीमारी की चपेट में आना। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल दुनिया भर में 30 लाख से ज्यादा बच्चे इंफेक्शन की चपेट में आ रहे हैं। इनमें से 20 लाख बच्चों को टीकों से बचाया जा रहा है, लेकिन यह संख्या हर साल बढ़ती जा रही है।

हाइजीन की कमी है मुख्य वजह
दरअसल ज्यादातर बच्चे आंख, नाक और मुंह को हाथ लगाते रहते हैं और उसी हाथ से अन्य चीजों को छूते हैं। जब वही चीज दूसरा बच्चा छूता है, वायरस या बैक्टीरिया उसके हाथों तक पहुंच जाते हैं और जब बच्चा उसी हाथ से अपनी आंख, नाक, मुंह छूता है तो संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं।

गेस्ट्रोएंटेराइटिस
दस्त, जी मिचलाना, भूख में कमी, उल्टी, सिर दर्द होना, बुखार और पेट दर्द जैसे लक्षण इस बीमारी में दिखाई देते हैं। गेस्ट्रोएंटेराइटिस रोटा वायरस और नोनो वायरस की वजह से होता है। कई बार बच्चे वॉशरूम जाने के बाद या खाना खाने से पहले हाथ नहीं धोते, जिससे बड़ी आसानी से वे इसकी चपेट में आ जाते हैं। ई कोलाई और सालमोनेला भी डायरिया की एक वजह है। इलाज होने पर एक सप्ताह में यह समस्या ठीक हो सकती है लेकिन लापरवाही बरतने पर गंभीर स्थिति हो सकती है।

कान में इंफेक्शन
कई बार बच्चों में कान में खुजली और दर्द की शिकायत भी रहती है। इसका मुख्य कारण भी वायरल इंफेक्शन होता है। कई बार कान से तरल पदार्थ या खून का आना, सुनने की समस्या व बुखार जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं। कान में एक तरह का तरल पदार्थ होता है, जिसमें बैक्टीरिया उत्पन्न होने लगते हैं जिससे यह सभी समस्याएं सामने आने लगती हैं। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

एचएफएम डिजीज
हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज जिसे हरपेनजीना भी कहते हैं, एक तरह का वायरल इंफेक्शन होता है। यह कॉक्सेकी वायरस से होता है जो एक-दूसरे के संपर्क में आने से आसानी से फैलता है। खांसने या लार से यह वायरस फैलता है। वायरल इंफेक्शन होने की वजह से इसे ठीक होने के लिए किसी एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती, एक सप्ताह में यह अपने आप ठीक हो जाता है। गर्मी और बरसात में यह इंफेक्शन बच्चों में ज्यादा दिखाई देता है। इसमें हाथ, मुंह और पैरों पर छोटी-छोटी फुंसियां हो जाती हैं। कई बार गले, जीभ, हथेली और तलवों पर भी छोटे-छोटे घाव हो जाते हैं। इसके साथ ही बुखार, चिड़चिड़ापन और भूख न लगने जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं।

आई इंफेक्शन
आंखों का लाल व चिपचिपा होना, आंखों से पानी आना जैसी समस्याएं भी बच्चों में अक्सर देखने का मिलती हैं। यह भी ज्यादातर वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह से होता है। हल्के से संपर्क के साथ ही इसका वायरस या बैक्टीरिया फैल जाता है। वायरल कन्जंक्टि-वाइटिस में किसी तरह के उपचार की जरूरत नहीं होती है। यह एक-दो सप्ताह में ठीक हो जाता है। सलाइन आई ड्रॉप्स से भी इसमें राहत मिलती है। जबकि बैक्टीरियल इंफेक्शन में एंटीबॉयोटिक ड्रॉप्स या ऑइंटमेंट की जरूरत पड़ती है।

ऐसे बढ़ाएं इम्यूनिटी
मजबूत रोग प्रतिरोध क्षमता भी विभिन्न तरह के संक्रमणों से बच्चों को बचाने में मदद करती है। अगर बच्चे बार-बार सर्दी-जुकाम या अन्य इंफेक्शन का शिकार होते हैं, तो जरूरी है कि आप उनकी डाइट पर ध्यान दें। हैल्दी खानपान के जरिए बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाई जा सकती है। अपने बच्चों की डाइट में फल और सब्जियों को शामिल करें। गाजर, बीन्स, संतरा, स्ट्रॉबेरी आदि में विटामिन सी, कैरोटिनॉइड्स जैसे फाइटोन्यूटीएंट्स होते हैं। यह शरीर में इंफेक्शन से लडऩे वाले सफेद रक्त कणिकाओं का निर्माण बढ़ाते हैं।


हरे पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, मटर आदि में भरपूर एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। इसी तरह प्रोबायोटिक का सेवन करना चाहिए जो दही से मिल सकता है।


नींबू, संतरा, अंगूर आदि में पर्याप्त विटामिन सी होता है जो इम्यूनिटी बढ़ाता है। इसके अलावा दूध व अन्य डेयरी प्रोडक्ट से विटामिन ए प्राप्त होता है जो स्वस्थ त्वचा और आंखों के साथ ही इंफेक्शन को रोकने में मदद करता है।


सूखे मेवे या नट्स में भी इम्यूनिटी बढ़ाने की क्षमता होती है। इसमें जिंक, विटामिन बी होता है जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है।


इसके अलावा बच्चों की आउटडोर एक्टिविटीज, गेम्स या एक्सरसाइज पर भी जोर दें।

जूं की समस्या
स्कूल के दौरान बच्चों में सबसे ज्यादा यह समस्या देखने को मिलती है। जूं छोटे कीड़े होते हैं जो हमारी सिर की त्वचा में रहते हैं और हमारे खून से अपना पेट भरते हैं। अपने लार से वह त्वचा पर खुजली जैसी समस्या पैदा करते हैं। एक-दूसरे के बालों के साथ ही एक-दूसरे की कंघी या ब्रश, टोपी या तकिया आदि का इस्तेमाल करने से संक्रमण होता है।

बच्चों को दें हाइजीन टिप्स
खाने से पहले और वॉशरूम जाने के बाद हाथ जरूर धोएं।
खांसने या छींकते वक्त मुंह पर रूमाल रखें।
पेंसिल, पेन स्केल या अन्य चीजों को मुंह में न डालें।
पानी पीने के लिए अपनी बॉटल का इस्तेमाल करें।
नल से पानी पीते वक्त नल में मुंह लगाने की बजाय गिलास का इस्तेमाल करें। बार-बार आंख, नाक या मुंह को न छुएं।



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बच्चे स्कूल में भी रहें फिट एंड कूल

सर्दी, जुकाम, पेट खराब, जूएं जैसी संक्रमण वाली बीमारियों से बच्चों का सबसे ज्यादा सामना स्कूल जाने के दौरान ही होता है। इसकी मुख्य वजह होती है हाइजीन का ख्याल न रखना और एक-दूसरे के संपर्क में आकर बीमारी की चपेट में आना। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल दुनिया भर में 30 लाख से ज्यादा बच्चे इंफेक्शन की चपेट में आ रहे हैं। इनमें से 20 लाख बच्चों को टीकों से बचाया जा रहा है, लेकिन यह संख्या हर साल बढ़ती जा रही है।

हाइजीन की कमी है मुख्य वजह
दरअसल ज्यादातर बच्चे आंख, नाक और मुंह को हाथ लगाते रहते हैं और उसी हाथ से अन्य चीजों को छूते हैं। जब वही चीज दूसरा बच्चा छूता है, वायरस या बैक्टीरिया उसके हाथों तक पहुंच जाते हैं और जब बच्चा उसी हाथ से अपनी आंख, नाक, मुंह छूता है तो संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं।

गेस्ट्रोएंटेराइटिस
दस्त, जी मिचलाना, भूख में कमी, उल्टी, सिर दर्द होना, बुखार और पेट दर्द जैसे लक्षण इस बीमारी में दिखाई देते हैं। गेस्ट्रोएंटेराइटिस रोटा वायरस और नोनो वायरस की वजह से होता है। कई बार बच्चे वॉशरूम जाने के बाद या खाना खाने से पहले हाथ नहीं धोते, जिससे बड़ी आसानी से वे इसकी चपेट में आ जाते हैं। ई कोलाई और सालमोनेला भी डायरिया की एक वजह है। इलाज होने पर एक सप्ताह में यह समस्या ठीक हो सकती है लेकिन लापरवाही बरतने पर गंभीर स्थिति हो सकती है।

कान में इंफेक्शन
कई बार बच्चों में कान में खुजली और दर्द की शिकायत भी रहती है। इसका मुख्य कारण भी वायरल इंफेक्शन होता है। कई बार कान से तरल पदार्थ या खून का आना, सुनने की समस्या व बुखार जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं। कान में एक तरह का तरल पदार्थ होता है, जिसमें बैक्टीरिया उत्पन्न होने लगते हैं जिससे यह सभी समस्याएं सामने आने लगती हैं। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

एचएफएम डिजीज
हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज जिसे हरपेनजीना भी कहते हैं, एक तरह का वायरल इंफेक्शन होता है। यह कॉक्सेकी वायरस से होता है जो एक-दूसरे के संपर्क में आने से आसानी से फैलता है। खांसने या लार से यह वायरस फैलता है। वायरल इंफेक्शन होने की वजह से इसे ठीक होने के लिए किसी एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती, एक सप्ताह में यह अपने आप ठीक हो जाता है। गर्मी और बरसात में यह इंफेक्शन बच्चों में ज्यादा दिखाई देता है। इसमें हाथ, मुंह और पैरों पर छोटी-छोटी फुंसियां हो जाती हैं। कई बार गले, जीभ, हथेली और तलवों पर भी छोटे-छोटे घाव हो जाते हैं। इसके साथ ही बुखार, चिड़चिड़ापन और भूख न लगने जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं।

आई इंफेक्शन
आंखों का लाल व चिपचिपा होना, आंखों से पानी आना जैसी समस्याएं भी बच्चों में अक्सर देखने का मिलती हैं। यह भी ज्यादातर वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह से होता है। हल्के से संपर्क के साथ ही इसका वायरस या बैक्टीरिया फैल जाता है। वायरल कन्जंक्टि-वाइटिस में किसी तरह के उपचार की जरूरत नहीं होती है। यह एक-दो सप्ताह में ठीक हो जाता है। सलाइन आई ड्रॉप्स से भी इसमें राहत मिलती है। जबकि बैक्टीरियल इंफेक्शन में एंटीबॉयोटिक ड्रॉप्स या ऑइंटमेंट की जरूरत पड़ती है।

ऐसे बढ़ाएं इम्यूनिटी
मजबूत रोग प्रतिरोध क्षमता भी विभिन्न तरह के संक्रमणों से बच्चों को बचाने में मदद करती है। अगर बच्चे बार-बार सर्दी-जुकाम या अन्य इंफेक्शन का शिकार होते हैं, तो जरूरी है कि आप उनकी डाइट पर ध्यान दें। हैल्दी खानपान के जरिए बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाई जा सकती है। अपने बच्चों की डाइट में फल और सब्जियों को शामिल करें। गाजर, बीन्स, संतरा, स्ट्रॉबेरी आदि में विटामिन सी, कैरोटिनॉइड्स जैसे फाइटोन्यूटीएंट्स होते हैं। यह शरीर में इंफेक्शन से लडऩे वाले सफेद रक्त कणिकाओं का निर्माण बढ़ाते हैं।


हरे पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, मटर आदि में भरपूर एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। इसी तरह प्रोबायोटिक का सेवन करना चाहिए जो दही से मिल सकता है।


नींबू, संतरा, अंगूर आदि में पर्याप्त विटामिन सी होता है जो इम्यूनिटी बढ़ाता है। इसके अलावा दूध व अन्य डेयरी प्रोडक्ट से विटामिन ए प्राप्त होता है जो स्वस्थ त्वचा और आंखों के साथ ही इंफेक्शन को रोकने में मदद करता है।


सूखे मेवे या नट्स में भी इम्यूनिटी बढ़ाने की क्षमता होती है। इसमें जिंक, विटामिन बी होता है जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है।


इसके अलावा बच्चों की आउटडोर एक्टिविटीज, गेम्स या एक्सरसाइज पर भी जोर दें।

जूं की समस्या
स्कूल के दौरान बच्चों में सबसे ज्यादा यह समस्या देखने को मिलती है। जूं छोटे कीड़े होते हैं जो हमारी सिर की त्वचा में रहते हैं और हमारे खून से अपना पेट भरते हैं। अपने लार से वह त्वचा पर खुजली जैसी समस्या पैदा करते हैं। एक-दूसरे के बालों के साथ ही एक-दूसरे की कंघी या ब्रश, टोपी या तकिया आदि का इस्तेमाल करने से संक्रमण होता है।

बच्चों को दें हाइजीन टिप्स
खाने से पहले और वॉशरूम जाने के बाद हाथ जरूर धोएं।
खांसने या छींकते वक्त मुंह पर रूमाल रखें।
पेंसिल, पेन स्केल या अन्य चीजों को मुंह में न डालें।
पानी पीने के लिए अपनी बॉटल का इस्तेमाल करें।
नल से पानी पीते वक्त नल में मुंह लगाने की बजाय गिलास का इस्तेमाल करें। बार-बार आंख, नाक या मुंह को न छुएं।

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