google.com, pub-5031399508792770, DIRECT, f08c47fec0942fa0 जानें क्या है मिट्टी और धूप से बच्चों के बीमार होने की वजह - Ayurveda And Gharelu Vaidya Happy Diwali 2018

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जानें क्या है मिट्टी और धूप से बच्चों के बीमार होने की वजह

मौसम बदलते ही सबसे पहले बच्चे बीमार क्यों पड़ते हैं, इस बारे में क्या आपने कभी सोचा है। इसका आम जवाब होगा कि बच्चों में बीमारियों से लड़ने की इम्युनिटी कम होने के कारण ऐसा होता है लेकिन डॉक्टर इसकी एक बड़ी वजह हाइजीन हाइपोथीसिज्म को मानते हैं। इसका मतलब हमारी उस आदत से है जिसमें हम आजकल बच्चों को बहुत ज्यादा साफ-सफाई से रहने पर जोर देते हैं या फिर वे घरों में एसी में रहते हैं, बाहर मैदान-मिट्टी में खेलने नहीं जाते हैं जिससे उनका बाहरी चीजों से सीधा सम्पर्क नहीं हो पाता है। जब बच्चे बाहरी वातावरण के ज्यादा सम्पर्क में नहीं आएंगे तो उनका शरीर किसी दूसरे माहौल को तुरंत स्वीकार करने का आदी नहीं होगा और जैसे ही वे दूषित तत्वों या किटाणुओं के सम्पर्क में आएंगे तुरंत बीमार पड़ जाएंगे।

पल्मोनरी विशेषज्ञ (श्वसम तंत्र ) इसकी एक वजह एलर्जी की समस्या होना भी हो सकती है। किसी भी चीज से शरीर की अतिसंवेदनशीलता ही एलर्जी है यानी शरीर इस चीज को स्वीकार नहीं कर पा रहा है। इसके मरीजों में इलाज से पहले एलर्जी किस चीज से हो रही है, इसकी पहचान करना जरूरी है। हर मरीज में एलर्जी की वजह अलग-अलग होती है जैसे किसी को मौसम में बदलाव सूट नहीं करता, किसी को ठंडी हवा, धुआं, सिगरेट, कोई खास गंध, खानपान की चीजें, प्रदूषण से जुड़े कारण आदि। जब व्यक्ति इनके संपर्क में आता है तो उसकी नाक या गले में सबसे पहले इसके असर से सूजन या संक्रमण की शिकायत होती है। फिर ये संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचकर खांसी या कफ की दिक्कत करता है। एलर्जी की समस्या आनुवांशिकीय होती है जो परिवार में चलती है यानी दादा-दादी से माता-पिता या भाई-बहिन में से किसी न किसी को कभी होने की हिस्ट्री रही होगी।



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जानें क्या है मिट्टी और धूप से बच्चों के बीमार होने की वजह

मौसम बदलते ही सबसे पहले बच्चे बीमार क्यों पड़ते हैं, इस बारे में क्या आपने कभी सोचा है। इसका आम जवाब होगा कि बच्चों में बीमारियों से लड़ने की इम्युनिटी कम होने के कारण ऐसा होता है लेकिन डॉक्टर इसकी एक बड़ी वजह हाइजीन हाइपोथीसिज्म को मानते हैं। इसका मतलब हमारी उस आदत से है जिसमें हम आजकल बच्चों को बहुत ज्यादा साफ-सफाई से रहने पर जोर देते हैं या फिर वे घरों में एसी में रहते हैं, बाहर मैदान-मिट्टी में खेलने नहीं जाते हैं जिससे उनका बाहरी चीजों से सीधा सम्पर्क नहीं हो पाता है। जब बच्चे बाहरी वातावरण के ज्यादा सम्पर्क में नहीं आएंगे तो उनका शरीर किसी दूसरे माहौल को तुरंत स्वीकार करने का आदी नहीं होगा और जैसे ही वे दूषित तत्वों या किटाणुओं के सम्पर्क में आएंगे तुरंत बीमार पड़ जाएंगे।

पल्मोनरी विशेषज्ञ (श्वसम तंत्र ) इसकी एक वजह एलर्जी की समस्या होना भी हो सकती है। किसी भी चीज से शरीर की अतिसंवेदनशीलता ही एलर्जी है यानी शरीर इस चीज को स्वीकार नहीं कर पा रहा है। इसके मरीजों में इलाज से पहले एलर्जी किस चीज से हो रही है, इसकी पहचान करना जरूरी है। हर मरीज में एलर्जी की वजह अलग-अलग होती है जैसे किसी को मौसम में बदलाव सूट नहीं करता, किसी को ठंडी हवा, धुआं, सिगरेट, कोई खास गंध, खानपान की चीजें, प्रदूषण से जुड़े कारण आदि। जब व्यक्ति इनके संपर्क में आता है तो उसकी नाक या गले में सबसे पहले इसके असर से सूजन या संक्रमण की शिकायत होती है। फिर ये संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचकर खांसी या कफ की दिक्कत करता है। एलर्जी की समस्या आनुवांशिकीय होती है जो परिवार में चलती है यानी दादा-दादी से माता-पिता या भाई-बहिन में से किसी न किसी को कभी होने की हिस्ट्री रही होगी।

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