अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है, जिसके कारण मरीज की याद्दाश्त कमजोर हो जाती है और इसका असर दिमाग के कार्यों पर पड़ता है। आमतौर पर यह मध्यम उम्र या वृद्धावस्था में दिमाग के टिशू को नुकसान पहुंचने के कारण होता है। यह डीमेंशिया का सबसे आम प्रकार है, जिसका असर व्यक्ति की याद्दाश्त, सोचने की क्षमता, रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ता है। यह भी सच है कि इसका कोई स्थाई इलाज नहीं है, लेकिन ये भी सच है कि इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।
प्रमुख लक्षण...
इसकी शुरुआत नाम भूलने से होती है। इसके बाद सोचने-समझने में मुश्किल होने लगती है। खासतौर पर शाम के समय मानसिक रूप से भ्रमित होना, एकाग्रता में कमी, नई चीजें सीखने की क्षमता में कमी, साधारण सी गणना करने में मुश्किल महसूस करना या आस-पास की चीजों/ लोगों को पहचानने में मुश्किल होना।
ऐसे पाएं भूलने पर काबू...
- बीमारी के शुरुआती दौर में नियमित जांच और इलाज से इस पर काबू पाया जा सकता है।
- बौद्धिक गतिविधियों से जुड़ें। साथ ही पढ़ाई, खेलकूद जैसे क्राास वर्ड और अन्य दिमागी शक्ति लगने वाली गतिविधियों के साथ सामाजिक क्रियाकलाप में सक्रिय रहना चाहिए। रोज टहलना और थोड़ा व्यायाम करना चाहिए।
- बादाम और ड्राई फ्रूट खाने से दिमाग तेज होता है और याददाश्त बढ़ती है। फूलगोभी के सेवन से दिमाग तेज होता है। अल्जाइमर के दौरान दिमाग में बढऩे वाले जहरीले बीटा-एमिलॉयड नामक प्रोटीन के प्रभाव को ग्रीन टी के सेवन से कम किया जा सकता है। हरी पत्तेदार सब्जियां, फलियां, साबुत अनाज, मछली, जैतून का तेल अल्जाइमर रोग से लडऩे में मदद करती हैं।
- रोजाना व्यायाम और योग करके अल्जाइमर के प्रभाव को कम किया जा सकता है। मेडिटेशन करने से भूलने की समस्या पर काबू पा सकते हैं। याददाश्त तेज करने के लिए सर्वांगासन करें। दिमाग तेज करना हो और याददाश्त बनाए रखनी हो तो भुजंगासन करें। एकाग्रता बढ़ाने के लिए कपालभाति प्राणायाम करें।
क्या न खाएं
- अगर अल्जाइमर रोग हो तो तिल, सूखे टमाटर, कद्दू, मक्खन, चीज, फ्राइड फूड, जंकफूड, रेड मीट, पेस्ट्रीज और मीठे का सेवन न करें।
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बहुत आसान है भूलने की बीमारी पर काबू पाना, अपनाएं ये अचूक तरीके
अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है, जिसके कारण मरीज की याद्दाश्त कमजोर हो जाती है और इसका असर दिमाग के कार्यों पर पड़ता है। आमतौर पर यह मध्यम उम्र या वृद्धावस्था में दिमाग के टिशू को नुकसान पहुंचने के कारण होता है। यह डीमेंशिया का सबसे आम प्रकार है, जिसका असर व्यक्ति की याद्दाश्त, सोचने की क्षमता, रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ता है। यह भी सच है कि इसका कोई स्थाई इलाज नहीं है, लेकिन ये भी सच है कि इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।
प्रमुख लक्षण...
इसकी शुरुआत नाम भूलने से होती है। इसके बाद सोचने-समझने में मुश्किल होने लगती है। खासतौर पर शाम के समय मानसिक रूप से भ्रमित होना, एकाग्रता में कमी, नई चीजें सीखने की क्षमता में कमी, साधारण सी गणना करने में मुश्किल महसूस करना या आस-पास की चीजों/ लोगों को पहचानने में मुश्किल होना।
ऐसे पाएं भूलने पर काबू...
- बीमारी के शुरुआती दौर में नियमित जांच और इलाज से इस पर काबू पाया जा सकता है।
- बौद्धिक गतिविधियों से जुड़ें। साथ ही पढ़ाई, खेलकूद जैसे क्राास वर्ड और अन्य दिमागी शक्ति लगने वाली गतिविधियों के साथ सामाजिक क्रियाकलाप में सक्रिय रहना चाहिए। रोज टहलना और थोड़ा व्यायाम करना चाहिए।
- बादाम और ड्राई फ्रूट खाने से दिमाग तेज होता है और याददाश्त बढ़ती है। फूलगोभी के सेवन से दिमाग तेज होता है। अल्जाइमर के दौरान दिमाग में बढऩे वाले जहरीले बीटा-एमिलॉयड नामक प्रोटीन के प्रभाव को ग्रीन टी के सेवन से कम किया जा सकता है। हरी पत्तेदार सब्जियां, फलियां, साबुत अनाज, मछली, जैतून का तेल अल्जाइमर रोग से लडऩे में मदद करती हैं।
- रोजाना व्यायाम और योग करके अल्जाइमर के प्रभाव को कम किया जा सकता है। मेडिटेशन करने से भूलने की समस्या पर काबू पा सकते हैं। याददाश्त तेज करने के लिए सर्वांगासन करें। दिमाग तेज करना हो और याददाश्त बनाए रखनी हो तो भुजंगासन करें। एकाग्रता बढ़ाने के लिए कपालभाति प्राणायाम करें।
क्या न खाएं
- अगर अल्जाइमर रोग हो तो तिल, सूखे टमाटर, कद्दू, मक्खन, चीज, फ्राइड फूड, जंकफूड, रेड मीट, पेस्ट्रीज और मीठे का सेवन न करें।