google.com, pub-5031399508792770, DIRECT, f08c47fec0942fa0 अनाज को सही तरह से खाना थैरेपी से कम नहीं - Ayurveda And Gharelu Vaidya Happy Diwali 2018

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अनाज को सही तरह से खाना थैरेपी से कम नहीं

हमारे भोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है अनाज। लेकिन कौनसा अनाज कितना फायदेमंद है इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है। आइए जानते हैं कि खाने में किस अनाज को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और किसे ज्यादा नहीं खाना चाहिए।

चावल

चावल जितना पुराना हो उतना ही स्वादिष्ट होता है। चावल में प्रोटीन, विटामिन और खनिज तत्व होते हैं। अगर रात के खाने में रोटी कम खाई जाए और चावल का प्रयोग ज्यादा किया जाए, तो यह हल्का भोजन आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होगा। चावल के चिवड़े को दूध में भिगोकर खाने से कब्ज दूर होती है।
ऐसे खाएं: चावल के मांड में प्रोटीन, विटामिन व खनिज होते हैं जो सेहत के लिए लाभदायक होते हैं, इसलिए चावल में से मांड ना निकालें। बच्चे को छह महीने का होते ही चावल का मांड देना चाहिए। यह बढ़ते बच्चे के लिए फायदेमंद होता है।

गेहूं

गेहूं औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके ज्वारे का रस पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, वजन कम होता है और एलर्जी संबंधी तकलीफ में भी लाभ होता है। गेहूं को अंकुरित करके भी खा सकते हैं। अंकुरित गेहूं आसानी से पच जाता है और कैलोरी ना होने की वजह से मोटापा भी नहीं बढ़ता।
ऐसे खाएं: खांसी होने पर 20 ग्राम गेहूं में नमक मिलाकर 250 ग्राम पानी में तक तक उबालें जब तक कि पानी की मात्रा एक तिहाई न रह जाए। इसे हल्का ठंडा होने पर पीएं। लगातार एक हफ्ते तक यह प्रयोग करने से आराम मिलता है।

जौ

इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जिससे कोलेस्ट्रोल घटता है। इसकी तासीर ठंडी होती है मधुमेह रोगियों के लिए जौ का आटा लाभदायक है। इससे शुगर नहीं बढ़ती। शरीर में चर्बी बढ़ जाने पर गेहूं व चावल छोडक़र जौ की रोटी के साथ छाछ पीएंंं। जौ का सत्तू ठंडा, कब्ज मिटाने वाला और पित्त दूर करने वाला होता है। जौ का पानी पीने से पथरी के रोगियों को भी आराम मिलता है।
ऐसे खाएं: जौ को पानी में धोकर सुखा लें, अब इसे कूट लें इसमें से छिलका अगल हो जाएगा। छाछ या दही के साथ इसकी राबड़ी बनाकर खाएं।


मूंग

मूंग को अंकुरित करने के बाद इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन की मात्रा दोगुनी हो जाती है।
ऐसे खाएं: बुखार व दस्त होने पर मूंग की दाल बनाते समय रोगी की स्थिति के अनुसार काली मिर्च व अदरक डाल दें, लेकिन इसे ज्यादा घी में ना बनाएं।

चना

भुने चने के साथ गुड़ खाने से कफ की समस्या दूर होती है। रात को भुना चना खाने से खांसी ठीक होती है। इसमें आयरन होने से यह महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद होते हैं।
ऐसे खाएं: 10 किलो आटे में एक किलो चने को पिसवा लें, इस आटे से बनी रोटी हृदय रोग, डायबिटीज और मोटापे को दूर करती है।

उड़द

उड़द की दाल गर्मियों से ज्यादा सर्दियों में उपयोगी होती है। यह बवासीर के रोग में फायदेमंद होती है। इसमें आयरन काफी मात्रा में होता है जो कि खून की कमी को दूर करता है।
ऐसे खाएं: इसकी दाल, लड्डू या हलवा बनाकर खा सकते हैं।

मसूर

मसूर की प्रकृति गर्म, शुष्क, रक्तवद्र्धक और खून में गाढ़ापन लाने वाली होती है। दस्त, कब्ज व अनियमित पाचन क्रिया में मसूर की दाल का सेवन लाभकारी होता है। दस्त होने पर मसूर की दाल खानी चाहिए। मसूर दाल की खिचड़ी भी बना कर खा सकते हैं। बवासीर के रोगियों के लिए मसूर की दाल गुणकारी है।



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अनाज को सही तरह से खाना थैरेपी से कम नहीं

हमारे भोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है अनाज। लेकिन कौनसा अनाज कितना फायदेमंद है इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है। आइए जानते हैं कि खाने में किस अनाज को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और किसे ज्यादा नहीं खाना चाहिए।

चावल

चावल जितना पुराना हो उतना ही स्वादिष्ट होता है। चावल में प्रोटीन, विटामिन और खनिज तत्व होते हैं। अगर रात के खाने में रोटी कम खाई जाए और चावल का प्रयोग ज्यादा किया जाए, तो यह हल्का भोजन आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होगा। चावल के चिवड़े को दूध में भिगोकर खाने से कब्ज दूर होती है।
ऐसे खाएं: चावल के मांड में प्रोटीन, विटामिन व खनिज होते हैं जो सेहत के लिए लाभदायक होते हैं, इसलिए चावल में से मांड ना निकालें। बच्चे को छह महीने का होते ही चावल का मांड देना चाहिए। यह बढ़ते बच्चे के लिए फायदेमंद होता है।

गेहूं

गेहूं औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके ज्वारे का रस पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, वजन कम होता है और एलर्जी संबंधी तकलीफ में भी लाभ होता है। गेहूं को अंकुरित करके भी खा सकते हैं। अंकुरित गेहूं आसानी से पच जाता है और कैलोरी ना होने की वजह से मोटापा भी नहीं बढ़ता।
ऐसे खाएं: खांसी होने पर 20 ग्राम गेहूं में नमक मिलाकर 250 ग्राम पानी में तक तक उबालें जब तक कि पानी की मात्रा एक तिहाई न रह जाए। इसे हल्का ठंडा होने पर पीएं। लगातार एक हफ्ते तक यह प्रयोग करने से आराम मिलता है।

जौ

इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जिससे कोलेस्ट्रोल घटता है। इसकी तासीर ठंडी होती है मधुमेह रोगियों के लिए जौ का आटा लाभदायक है। इससे शुगर नहीं बढ़ती। शरीर में चर्बी बढ़ जाने पर गेहूं व चावल छोडक़र जौ की रोटी के साथ छाछ पीएंंं। जौ का सत्तू ठंडा, कब्ज मिटाने वाला और पित्त दूर करने वाला होता है। जौ का पानी पीने से पथरी के रोगियों को भी आराम मिलता है।
ऐसे खाएं: जौ को पानी में धोकर सुखा लें, अब इसे कूट लें इसमें से छिलका अगल हो जाएगा। छाछ या दही के साथ इसकी राबड़ी बनाकर खाएं।


मूंग

मूंग को अंकुरित करने के बाद इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन की मात्रा दोगुनी हो जाती है।
ऐसे खाएं: बुखार व दस्त होने पर मूंग की दाल बनाते समय रोगी की स्थिति के अनुसार काली मिर्च व अदरक डाल दें, लेकिन इसे ज्यादा घी में ना बनाएं।

चना

भुने चने के साथ गुड़ खाने से कफ की समस्या दूर होती है। रात को भुना चना खाने से खांसी ठीक होती है। इसमें आयरन होने से यह महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद होते हैं।
ऐसे खाएं: 10 किलो आटे में एक किलो चने को पिसवा लें, इस आटे से बनी रोटी हृदय रोग, डायबिटीज और मोटापे को दूर करती है।

उड़द

उड़द की दाल गर्मियों से ज्यादा सर्दियों में उपयोगी होती है। यह बवासीर के रोग में फायदेमंद होती है। इसमें आयरन काफी मात्रा में होता है जो कि खून की कमी को दूर करता है।
ऐसे खाएं: इसकी दाल, लड्डू या हलवा बनाकर खा सकते हैं।

मसूर

मसूर की प्रकृति गर्म, शुष्क, रक्तवद्र्धक और खून में गाढ़ापन लाने वाली होती है। दस्त, कब्ज व अनियमित पाचन क्रिया में मसूर की दाल का सेवन लाभकारी होता है। दस्त होने पर मसूर की दाल खानी चाहिए। मसूर दाल की खिचड़ी भी बना कर खा सकते हैं। बवासीर के रोगियों के लिए मसूर की दाल गुणकारी है।

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