google.com, pub-5031399508792770, DIRECT, f08c47fec0942fa0 मेनोपॉज के बाद ये योग रहते फायदेमंद - Ayurveda And Gharelu Vaidya Happy Diwali 2018

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मेनोपॉज के बाद ये योग रहते फायदेमंद

माहवारी बंद होने के बाद का समय रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) कहा जाता है। महिलाओं में यह अवस्था 40 से 45 वर्ष की उम्र के बीच आती है। कुछ महिलाएं इस अवस्था को सरलता से स्वीकार नहीं कर पाती और मानसिक व शारीरिक रूप से परेशान रहने लगती हैं। ऐसी स्थिति में खुद को स्वस्थ रखने के लिए खानपान में पौष्टिक आहार, संतुलित जीवनशैली के साथ योग की कुछ सूक्ष्म क्रियाएं करके परेशानी को कम किया जा सकता है। जानते हैं ऐसे ही कुछ योगासनों के बारे में।

धनुरासन
इस आसन से मोटापा, डायबिटीज, कमर दर्द, अस्थमा, स्लिप्ड डिस्क, कब्ज, थायरॉयड और विस्थापित नाभि (धरण) संबंधी समस्याओं में आराम मिलता है। यह क्रिया 3 से 5 बार दोहरा सकते हैं। असहनीय कमर दर्द, हर्निया, अल्सर, उच्च रक्तचाप, सायटिका और पत्थरी संबंधी समस्या है तो न करें। इससे आपकी परेशानी बढ़ सकती है।

अधोमुख श्वानासन
इस आसन को 5 से 10 बार करना चाहिए। शरीर में खिंचाव से मांसपेशियों में मजबूती आती है। साइनस की समस्या से छुटकारा मिलता है। रक्त संचार ठीक रहता है। इससे सिर दर्द, अनिद्रा, थकान और सुस्ती जैसी समस्याओं में आराम मिलता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला और फेफड़े की क्षमता को बढ़ाता है। हाथ, कंधे, पैरों और पूरे शरीर को ताकतवर बनाता है। बीपी, कमजोर आंखें, कंधे की चोट और दस्त है तो इसे न करें।

मालासन
मालासन को गार्लेंड पोज भी कहते हैं। मालासन पैरों के साथ एडिय़ों, घुटनों और जांघों को मजबूती प्रदान करता है। शरीर से विषैले पदार्थों को निकालने में मदद करता है जो शरीर में किसी तरह की परेशानी होने से बचाता है। इसे खाली पेट करना चाहिए। यह रजोनिवृत्ति, गर्भाशय संबंधी तकलीफ, सामान्य प्रसव के लिए, अपच, जोड़ों में दर्द, जांघों के खिंचाव में लाभदायक है। इस योगासन को करते हुए एड़ी पर दबाव पडऩे से उसमें मोच आ सकती है।

शशांकासन
शशांकासन तनाव, कब्ज, चिड़चिड़ापन, आंत, सायटिका, पीठ दर्द, अस्थमा, मधुमेह, ह्रदय और फेफड़ों संबंधी रोग से पीडि़त महिलाओं के लिए लाभदायक है। एक बार में 3 से 5 बार कर सकते हैं। पीठ दर्द, स्लिप्ड डिस्क, हाई ब्लड प्रेशर, पेट दर्द, चककर आना, हर्निया से पीडि़त हैं तो इसे न करें, नुकसान हो सकता है।

बिना सलाह के न करें
महिलाएं जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी कोई भी समस्या है या पहले कोई ऑपरेशन हो चुका है या कमजोरी की शिकायत रहती है तो वे इन योगासन को योग विशेषज्ञ की सलाह के बिना न करें। इससे परेशानी बढ़ भी
सकती है।

ध्यान दें
सुबह के समय योग करना फायदेमंद होता है
किसी बीमारी का इलाज चल रहा तो पूछकर करें
खाना खाने के तुरंत बाद येाग नहीं करना चाहिए
योग करते हुए क्षमता से अधिक कोशिश न करें
बीमारी से ठीक हुईं हैं तो करने से पहले पूछ लें



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मेनोपॉज के बाद ये योग रहते फायदेमंद

माहवारी बंद होने के बाद का समय रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) कहा जाता है। महिलाओं में यह अवस्था 40 से 45 वर्ष की उम्र के बीच आती है। कुछ महिलाएं इस अवस्था को सरलता से स्वीकार नहीं कर पाती और मानसिक व शारीरिक रूप से परेशान रहने लगती हैं। ऐसी स्थिति में खुद को स्वस्थ रखने के लिए खानपान में पौष्टिक आहार, संतुलित जीवनशैली के साथ योग की कुछ सूक्ष्म क्रियाएं करके परेशानी को कम किया जा सकता है। जानते हैं ऐसे ही कुछ योगासनों के बारे में।

धनुरासन
इस आसन से मोटापा, डायबिटीज, कमर दर्द, अस्थमा, स्लिप्ड डिस्क, कब्ज, थायरॉयड और विस्थापित नाभि (धरण) संबंधी समस्याओं में आराम मिलता है। यह क्रिया 3 से 5 बार दोहरा सकते हैं। असहनीय कमर दर्द, हर्निया, अल्सर, उच्च रक्तचाप, सायटिका और पत्थरी संबंधी समस्या है तो न करें। इससे आपकी परेशानी बढ़ सकती है।

अधोमुख श्वानासन
इस आसन को 5 से 10 बार करना चाहिए। शरीर में खिंचाव से मांसपेशियों में मजबूती आती है। साइनस की समस्या से छुटकारा मिलता है। रक्त संचार ठीक रहता है। इससे सिर दर्द, अनिद्रा, थकान और सुस्ती जैसी समस्याओं में आराम मिलता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला और फेफड़े की क्षमता को बढ़ाता है। हाथ, कंधे, पैरों और पूरे शरीर को ताकतवर बनाता है। बीपी, कमजोर आंखें, कंधे की चोट और दस्त है तो इसे न करें।

मालासन
मालासन को गार्लेंड पोज भी कहते हैं। मालासन पैरों के साथ एडिय़ों, घुटनों और जांघों को मजबूती प्रदान करता है। शरीर से विषैले पदार्थों को निकालने में मदद करता है जो शरीर में किसी तरह की परेशानी होने से बचाता है। इसे खाली पेट करना चाहिए। यह रजोनिवृत्ति, गर्भाशय संबंधी तकलीफ, सामान्य प्रसव के लिए, अपच, जोड़ों में दर्द, जांघों के खिंचाव में लाभदायक है। इस योगासन को करते हुए एड़ी पर दबाव पडऩे से उसमें मोच आ सकती है।

शशांकासन
शशांकासन तनाव, कब्ज, चिड़चिड़ापन, आंत, सायटिका, पीठ दर्द, अस्थमा, मधुमेह, ह्रदय और फेफड़ों संबंधी रोग से पीडि़त महिलाओं के लिए लाभदायक है। एक बार में 3 से 5 बार कर सकते हैं। पीठ दर्द, स्लिप्ड डिस्क, हाई ब्लड प्रेशर, पेट दर्द, चककर आना, हर्निया से पीडि़त हैं तो इसे न करें, नुकसान हो सकता है।

बिना सलाह के न करें
महिलाएं जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी कोई भी समस्या है या पहले कोई ऑपरेशन हो चुका है या कमजोरी की शिकायत रहती है तो वे इन योगासन को योग विशेषज्ञ की सलाह के बिना न करें। इससे परेशानी बढ़ भी
सकती है।

ध्यान दें
सुबह के समय योग करना फायदेमंद होता है
किसी बीमारी का इलाज चल रहा तो पूछकर करें
खाना खाने के तुरंत बाद येाग नहीं करना चाहिए
योग करते हुए क्षमता से अधिक कोशिश न करें
बीमारी से ठीक हुईं हैं तो करने से पहले पूछ लें

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