
गर्मी में भूख से ज्यादा न खाएं। खाने को 5-6 बार थोड़ा-थोड़ा करके खाएं। इससे अपच, उल्टी व दस्त की समस्या नहीं होगी। खाना सीमित मात्रा में बनाएं क्योंकि बासी या ज्यादा देर तक रखा भोजन फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है। गर्मी में शरीर का तापमान ज्यादा होता है। ऐसे में अधिक तला-भुना, मसालेदार या गर्मागर्म भोजन न लें, इससे घमोरियां हो सकती हैं। गर्मी में डेंगू, मलेरिया, हैजा, डायरिया, चिकनगुनिया जैसी समस्याएं आम होती हैं। इनसे बचने के लिए खुले में बिक रही चाट, गोलगप्पे न खाएं व साफ-सफाई का ध्यान रखें।
फ्रिज का सीमित उपयोग करें -
फ्रिज में खाद्य पदार्थ 12-24 घंटे तक ही रखें। नहीं तो बाद में उनमें पोषक तत्त्वों की कमी हो जाती है।
पेशेंट्स का रखें खास ख्याल -
ब्लड प्रेशर : सीमित मात्रा में लें नमक लें, बीपी के मरीजों के शरीर में पसीने के माध्यम से जब पानी बाहर निकलता है तो इलेक्ट्रोलाइट का स्तर असामान्य हो जाता है। ऐसे में शरीर को क्रियाशील बनाने में सहायक सोडियम, पोटेशियम जैसे जरूरी सॉल्ट्स की कमी हो जाती है।
ये लें : कच्ची सब्जियां जैसे टमाटर, प्याज, खीरा, ककड़ी को भोजन में शामिल करें।
ये न लें : सीमित मात्रा में नमक लें। खरबूजा व लीची से परहेज करें क्योंकि इनमें सोडियम की मात्रा अन्य फलों से ज्यादा होती है।
ध्यान रखें : गर्मी में अक्सर ब्लड प्रेशर कम होने की शिकायत होती है इसलिए ऐसे मरीज वजन नियंत्रित रखें। घर से निकलने से पहले लिक्विड डाइट लें और साथ में एक मौसमी फल रखें।
डायबिटीज :
इनसे बढ़ता है शुगर का स्तर -
नींबू, नारियल पानी, शरबत व जूस पानी की पूर्ति तो करते हैं लेकिन ये डायबिटिक पेशेंट्स के शरीर को नुकसान पहुंचाकर शुगर के स्तर को बढ़ा देते हैं।
ध्यान रखें : डॉक्टर द्वारा निर्देशित परहेज का ध्यान रखेंं। पानी पीकर घर से बाहर निकलें। अपने साथ पानी की बोतल, दवाएं और मीठी चीज साथ में रखें ताकि शुगर घटने या बढऩे पर दिक्कत न हो।
ये लें : छाछ, नींबू पानी, दही, आमपना जैसे नमकीन पेय पदार्थ लें। इनमें से किसी एक को मरीज दिन में 5-6 बार ली जा सकती है।
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गर्मियों में सेहत को लेकर रखें सावधानी ताकि तकलीफें न हों हावी

गर्मी में भूख से ज्यादा न खाएं। खाने को 5-6 बार थोड़ा-थोड़ा करके खाएं। इससे अपच, उल्टी व दस्त की समस्या नहीं होगी। खाना सीमित मात्रा में बनाएं क्योंकि बासी या ज्यादा देर तक रखा भोजन फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है। गर्मी में शरीर का तापमान ज्यादा होता है। ऐसे में अधिक तला-भुना, मसालेदार या गर्मागर्म भोजन न लें, इससे घमोरियां हो सकती हैं। गर्मी में डेंगू, मलेरिया, हैजा, डायरिया, चिकनगुनिया जैसी समस्याएं आम होती हैं। इनसे बचने के लिए खुले में बिक रही चाट, गोलगप्पे न खाएं व साफ-सफाई का ध्यान रखें।
फ्रिज का सीमित उपयोग करें -
फ्रिज में खाद्य पदार्थ 12-24 घंटे तक ही रखें। नहीं तो बाद में उनमें पोषक तत्त्वों की कमी हो जाती है।
पेशेंट्स का रखें खास ख्याल -
ब्लड प्रेशर : सीमित मात्रा में लें नमक लें, बीपी के मरीजों के शरीर में पसीने के माध्यम से जब पानी बाहर निकलता है तो इलेक्ट्रोलाइट का स्तर असामान्य हो जाता है। ऐसे में शरीर को क्रियाशील बनाने में सहायक सोडियम, पोटेशियम जैसे जरूरी सॉल्ट्स की कमी हो जाती है।
ये लें : कच्ची सब्जियां जैसे टमाटर, प्याज, खीरा, ककड़ी को भोजन में शामिल करें।
ये न लें : सीमित मात्रा में नमक लें। खरबूजा व लीची से परहेज करें क्योंकि इनमें सोडियम की मात्रा अन्य फलों से ज्यादा होती है।
ध्यान रखें : गर्मी में अक्सर ब्लड प्रेशर कम होने की शिकायत होती है इसलिए ऐसे मरीज वजन नियंत्रित रखें। घर से निकलने से पहले लिक्विड डाइट लें और साथ में एक मौसमी फल रखें।
डायबिटीज :
इनसे बढ़ता है शुगर का स्तर -
नींबू, नारियल पानी, शरबत व जूस पानी की पूर्ति तो करते हैं लेकिन ये डायबिटिक पेशेंट्स के शरीर को नुकसान पहुंचाकर शुगर के स्तर को बढ़ा देते हैं।
ध्यान रखें : डॉक्टर द्वारा निर्देशित परहेज का ध्यान रखेंं। पानी पीकर घर से बाहर निकलें। अपने साथ पानी की बोतल, दवाएं और मीठी चीज साथ में रखें ताकि शुगर घटने या बढऩे पर दिक्कत न हो।
ये लें : छाछ, नींबू पानी, दही, आमपना जैसे नमकीन पेय पदार्थ लें। इनमें से किसी एक को मरीज दिन में 5-6 बार ली जा सकती है।